हम भारत के आंध्र प्रदेश के प्रसांतिनिलायम में सौंफ की आपूर्ति और व्यापार में लगे हुए हैं। सौंफ (मधुरिका) एक मसाला पौधा है जिसका उपयोग हजारों वर्षों से आयुर्वेदिक चिकित्सा में किया जाता रहा है। इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। यह रक्त और यकृत के लिए अच्छा है। मेटाबॉलिज्म, पाचन को बढ़ाता है और पेट को मजबूत बनाता है। ऊर्जावान प्रभाव: स्वाद (रस): मीठा (मधुरा), गर्म (काटू), कड़वा (तीखा) पोटेंसी (वीरा): कूलिंग (शीट) पाचन के बाद का स्वाद (विपक): मीठा (मधुरा) गुण (गुण): प्रकाश (लघू), तैलीय (स्निग्धा) संवैधानिक ऊर्जा (दोशा): = VPK (तीन दोषों को संतुलित करता है) ऊतक तत्व (धातु): प्लाज्मा (रस), रक्त (रक्त), मांसपेशियां (मांसा), तंत्रिकाएं (माजा) चैनल (श्रोता): श्वसन (प्रणवा), पाचक (अनावाह), तंत्रिका (मज्जा), मूत्र, प्रजनन, रक्त और यकृत (रसवाह)। विशिष्ट प्रभाव (प्रभव): पाचक अग्नि (दीपन), विषाक्त पदार्थ (अमादोशहारा), परजीवी रोधी (क्रिमिग्ना), शक्ति (बाल्य) सौंफ के घरेलू उपाय: